घाटी में सेना का नया नारा- उन्हें जिंदा पकड़ो
घाटी में आतंकवाद को लेकर सुरक्षा बल अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करने जा रहे हैं । पिछले कुछ माह में 70 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराने वाले सुरक्षा बल अब नया नारा लेकर आए हैं 'उन्हें जिंदा पकड़ो' । सुरक्षा बलों की रणनीति में इस बदलाव का उद्देश्य आतंकवादी संगठनों में नए शामिल होने वालों पर ध्यान केंद्रित करना और उन्हें अपने परिवारों के पास लौटने के लिए प्रेरित करना है।
वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की इस रणनीति का उद्देश्य आतंकवादियों के लिए जमीन पर काम करने वालों के नेटवर्क को ध्वस्त करना है जिसकी युवाओं को कट्टर बनाकर उन्हें जेहाद में धकेलने में महत्वपूर्ण भूमिका है। आतंकवाद निरोधक अभियानों में शामिल एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हमारा उद्देश्य उन्हें जिंदा पकड़ना और उनकी शिकायतों को समझना है। आखिरकार 15 या 16 वर्ष के किशोर का इस सीमा तक ‘ब्रेनवॉश’ नहीं किया जा सकता कि वह मुठभेड़ में मरना चाहे। इसमें कोई संबंध होना चाहिए।’
अधिकारियों ने कहा कि केंद्र द्वारा सुरक्षा बलों को रमजान के दौरान आतंकवाद निरोधक अभियान नहीं शुरू करने के लिए कहने से पहले सद्दाम पोद्दार, इसा फजल और समीर टाइगर जैसे कट्टर आतंकवादियों को मुठभेड़ में मार गिराने की जरूरत थी क्योंकि पाकिस्तानी आतंकवादी संगठनों जैसे लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन में युवाओं को शामिल करने के पीछे उनका ही दिमाग काम कर रहा था। शीर्ष आतंकवादी कमांडरों को मार गिराने के बाद अब रणनीति में बदलाव के प्रयास किए जा रहे हैं।
अधिकारियों ने कहा कि विशिष्ट सूचना पर आधारित अभियान तो जारी रहेंगे लेकिन आतंकवादी संगठनों में हाल में शामिल हुए आतंकियों को जिंदा पकड़ने पर जोर दिया जाएगा। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हमें हमारे जमीनी गुप्तचर प्रणाली से संकेत मिले हैं कि कई वापस लौटना चाहते हैं। कुछ अभिभावकों ने हमसे सम्पर्क किया और हमें उनकी सामान्य जीवन और शिक्षा फिर से शुरू करने में मदद करने में कोई हिचक नहीं है।’
वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की इस रणनीति का उद्देश्य आतंकवादियों के लिए जमीन पर काम करने वालों के नेटवर्क को ध्वस्त करना है जिसकी युवाओं को कट्टर बनाकर उन्हें जेहाद में धकेलने में महत्वपूर्ण भूमिका है। आतंकवाद निरोधक अभियानों में शामिल एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हमारा उद्देश्य उन्हें जिंदा पकड़ना और उनकी शिकायतों को समझना है। आखिरकार 15 या 16 वर्ष के किशोर का इस सीमा तक ‘ब्रेनवॉश’ नहीं किया जा सकता कि वह मुठभेड़ में मरना चाहे। इसमें कोई संबंध होना चाहिए।’
अधिकारियों ने कहा कि केंद्र द्वारा सुरक्षा बलों को रमजान के दौरान आतंकवाद निरोधक अभियान नहीं शुरू करने के लिए कहने से पहले सद्दाम पोद्दार, इसा फजल और समीर टाइगर जैसे कट्टर आतंकवादियों को मुठभेड़ में मार गिराने की जरूरत थी क्योंकि पाकिस्तानी आतंकवादी संगठनों जैसे लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन में युवाओं को शामिल करने के पीछे उनका ही दिमाग काम कर रहा था। शीर्ष आतंकवादी कमांडरों को मार गिराने के बाद अब रणनीति में बदलाव के प्रयास किए जा रहे हैं।
अधिकारियों ने कहा कि विशिष्ट सूचना पर आधारित अभियान तो जारी रहेंगे लेकिन आतंकवादी संगठनों में हाल में शामिल हुए आतंकियों को जिंदा पकड़ने पर जोर दिया जाएगा। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हमें हमारे जमीनी गुप्तचर प्रणाली से संकेत मिले हैं कि कई वापस लौटना चाहते हैं। कुछ अभिभावकों ने हमसे सम्पर्क किया और हमें उनकी सामान्य जीवन और शिक्षा फिर से शुरू करने में मदद करने में कोई हिचक नहीं है।’


Sahi to hai
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